
पंजाबः मालवा, जो शराब माफिया की वजह से सबसे ज्यादा बदनाम है, वहीं इसके खिलाफ चिंगारियां भी उठीं हैं क्योंकि एक हफ्ते में लगातार दो कत्ल होने के बाद मालवा फिर चर्चा में है, इसलिए कई पंचायतें, संस्थाएं और जनसमूह इसके खिलाफ एकजुट हो गए हैं।
मालवा में 16 अलग-अलग संगठनों ने 186 ग्राम पंचायतों को इसी साल शराब फ्री किया था। अब सभी संगठनों को एकजुट करके महासंगठन बनाया जाएगा। अबोहर कांड में मारे गए भीम की मां कौशल्या देवी आगे आई हैं। मुक्तसर के महिला संगठन से जुड़ीं रानी कौर और रानी देवी ने कहा कि ये मुहिम पूरे मालवा में चलनी चाहिए, इसलिए सबको एकजुट होना पड़ेगा।
कौशल्या हर उस मां का दर्द बांटने पहुंची , जो शराब माफिया के हाथों मारा गया। वह कहती हैं, अब सवाल सिर्फ भीम की मौत का नहीं, मानसा में मारे गए सुखचैन का भी नहीं, बल्कि हर उस बच्चे का है, जो शराब माफिया के चंगुल में फंसा है। उन्हें मुक्त कराना है। वहीं बरनाला जिले में शाराब माफिया ने ठेका खोलने के लिए फर्जी नाम का गांव दिखा दिया। गांव पत्ती सेखवां में कभी शराब का ठेका नहीं खुला तो विभाग ने गांव के बाॅर्डर पर पत्ती सोहिया गांव के नाम से ठेका खोल दिया।
पास के गांव को पता चला तो लोग सड़कों पर उतर गए। मजबूरन सरकार को ठेका बंद कराना पड़ा। इसका असर ये हुआ कि जिले के 13 गांवों ने शराब के ठेके नहीं खुलने दिए। हालांकि, माफिया ने पुलिस से मिलकर यहां के लोगों पर केस दर्ज कराए, जो झूठे साबित हुए। साइंटिफिक अवेयरनेस एंड सोशल वेलफेयर फोरम के प्रधान डाॅ. ए.एस. मान और पीपल फॉर ट्रांसपेरेंसी के सचिव एडवोकेट कमल आनंद ने कहा कि अगले साल हमारी कोशिश रहेगी कि जिले का हर गांव शराब माफिया के खिलाफ खड़ा हो।
उधर सीएम प्रकाश सिंह बादल के गृह जिले के गांव डोहक के लोगों को शराब से मुक्ति दिलाने के लिए तीन महीने तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा। गांववासियों ने ठेके के सामने धरना लगाया। इसे नाकाम करने के लिए शराब ठेकेदारों ने पूरी ताकत लगा दी।
लोगों को टस से मस न होता देख, ठेकेदार ने रिहायशी इलाके से निकालकर ठेका दाना मंडी में शिफ्ट कर दिया। साथ ही पंचायत मेंबर्स समेत 22 लोगों के खिलाफ केस दर्ज करवाया। लेकिन बाद में सभी पर्चे कैंसिल करने पड़े।
गांवों की ओर से शुरू की गई सार्थक पहल से सरकारी खजाने को करीब 5 करोड़ का नुकसान हुआ। ये वो पैसा है जो सरकार को रेवेन्यू के रूप में आना था।
